अपनी दुर्गमता की वजह से कैलास-मानसरोवर यात्रा
धार्मिक आस्था का तो चरम है ही, प्रकृति के आनंद का भी चरम है। विडंबना की
बात यही है कि भारत से कैलास जाना समय व धन, दोनों के लिहाज से दुरूह है।
कैलास पर्वत व मानसरोवर झील, दोनों ही चीन में हैं।
सरकारी यात्रा: भारत से सीधे वहां जाने का एक ही तरीका है, और वह है विदेश
मंत्रालय द्वारा हर साल आयोजित की जाने वाली कैलास-मानसरोवर यात्रा। इस साल
यह यात्रा 9 जून से 9 सितंबर के बीच आयोजित की जाएगी। इस दौरान यात्रियों
के कुल 18 दस्ते जाएंगे। हर ग्रुप में अधिकतम 60 यात्री ही होंगे। इसके लिए
आवेदन मांग लिए गए हैं और आवेदन जमा कराने की अंतिम तारीख 11 मार्च
है।
कुल 22 दिन की यह यात्रा दिल्ली से शुरू होती है। उत्तराखंड में धारचूला
तक का रास्ता बस से पूरा होता है और उसके आगे का सफर पैदल करना होता है।
लिपुलेख के रास्ते चीन की सीमा में प्रवेश करने से पहले भारत में चार दिन
का यह ट्रैक काफी दुष्कर होता है। ट्रैकिंग के शौकीनों के लिए यह सबसे
खूबसूरत रास्तों में से भी एक है। खास तौर पर नाभीढांग में ओम पर्वत का
नजारा बेहद दुर्लभ है। लेकिन इसमें भी कोई शक नहीं कि कैलास-मानसरोवर
यात्रा पर जाना, हरेक के बस की बात नहीं। केवल इसलिए नहीं कि वह काफी
श्रमसाध्य होती है, बल्कि इसलिए भी कि यह बेहद खर्चीली भी होती है। खर्च का
अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि सरकारी यात्रा पर भी एक यात्री का
लगभग सवा लाख रुपये तक खर्च हो जाता है। इसके लिए शर्ते भी कड़ी होती हैं,
औपचारिकताएं भी कई सारी पूरी करनी होती है और उसके बाद जाने वाले यात्रियों
के लिए सारे आवेदकों में से ड्रा निकाला जाता है। यात्रियों की सुविधा के
लिए हिमाचल प्रदेश के रास्ते कैलास का दूसरा रास्ता भी खोले जाने की योजना
रही है लेकिन अभी उस पर आगे कोई काम नहीं हुआ है।
बरास्ता नेपाल: लेकिन कैलास-मानसरोवर जाने का एक रास्ता नेपाल होकर भी है।
यह रास्ता खर्च, समय व तकलीफ- तीनों लिहाज से कम है। इसलिए अब कई भारतीय
नेपाल होकर कैलास-मानसरोवर जाने लगे हैं। इ रास्ते कैलास जाने वालों की कोई
समय-सीमा या संख्या सीमा भी नहीं है। इसलिए भारत व नेपाल में कई टूर
ऑपरेटर कैलास-मानसरोवर यात्रा पर ले जाने लगे हैं। इन यात्राओं में भी दो
तरीके हैं। एक तो वाहन पर सैर करते हुए है और दूसरा, जिसमें नेपाल के भीतर
का काफी रास्ता हेलीकॉप्टर के जरिये पूरा कर लिया जाता है। चीन के भीतर
कैलास व मानसरोवर तक की यात्रा भी वाहन पर पूरी कराई जाती है। बस परिक्रमा
का कुछ हिस्सा पैदल ट्रैक करके पूरा करना होता है। वाहन से की जाने वाली
यात्रा पर प्रति यात्री 75 हजार से 90 हजार रुपये तक का खर्च आता है। यह
अलग-अलग ऑपरेटरों द्वारा दी जाने वाली सुविधाओं, यात्रा के रास्ते आदि पर
निर्भर करता है। वहीं हेलीकॉप्टर की मदद से पूरी की जाने वाली यात्रा में
प्रति यात्री डेढ़ लाख रुपये तक का खर्च आता है। यह अंदाजा लगाया ही जा
सकता है कि प्राइवेट ऑपरेटरों की वजह से यात्रा के शुल्क में प्रतिस्पर्धा
और बारगेनिंग की भी काफी भूमिका रहती है।
तैयारी जरूरी: कैलास पर्वत व मानसरोवर झील, दोनों ही काफी ऊंचाई पर स्थित
हैं। इसलिए वहां जाने के लिए शारीरिक रूप से काफी तैयारी की जरूरत होती है।
कैलास परिक्रमा में पांच हजार मीटर तक की ऊंचाई को पार करना पड़ता है।
चरणस्पर्श की ऊंचाई तो 5340 मीटर बताई जाती है। ऊंचाई पर होने की वजह से
यहां साल के ज्यादातर समय बर्फ का साम्राज्य होता है। इसलिए यह यात्रा मई
के बाद ही संभव हो पाती है और सिंतबर के बाद यहां जा पाना मुमकिन नहीं
होता। इस दौरान भी मौसम अनुकूल रहे तो इसे कुदरत की मेहरबानी समझना चाहिए।
ankur gusain
दस्तक
Tuesday, 26 February 2013
Friday, 21 December 2012
उत्तराखंड के मंत्रियों की मोज -आम जनता के पैसो पर

आम जनता पर कर(टैक्स ). के बोझ बढे जा रहे हैं फिर भी उत्तराखंड राज कोष में राज्य को चलाने के लिए पूंजी की कमी पड रही है और उत्तराखंड सरकार ने मंत्रियों को नयी लग्जरी गाड़ियाँ देने का प्रस्ताव पास कर दिया है ।अब कुछ समय बाद सभी मंत्री ऍमबस्टर की जगह लग्जरी गाड़ियों में नजर आयेंगे । आखिर सरकार जनता की समस्याओं को दूर करने के बजाये जनता पर ओर बोझ बढ़ा रही है जनता के पैसों से मन्त्रिगणों को मोज करने का आखिर क्या हक़ है । जनता ने सारकार को निर्वाचित किया इसका यह मतलब नही की वो सरकार अब 5 शालों तक अपनी मनमानी करे। सरकार को कोई भी फेसला करने से पहले राज्य की जनता से उस बारे में सर्वे कर राय लेनी चाहिए थी क्यूंकि ये राजकोष किसी मंत्री का नही बल्कि जनता का है जिसका प्रयोग किस प्रकार करना है इसका फैसला करने का हक़ सिर्फ जनता को ही होना चाहिए
कृष्णा मुरारी
(ऋषिकेश )

आम जनता पर कर(टैक्स ). के बोझ बढे जा रहे हैं फिर भी उत्तराखंड राज कोष में राज्य को चलाने के लिए पूंजी की कमी पड रही है और उत्तराखंड सरकार ने मंत्रियों को नयी लग्जरी गाड़ियाँ देने का प्रस्ताव पास कर दिया है ।अब कुछ समय बाद सभी मंत्री ऍमबस्टर की जगह लग्जरी गाड़ियों में नजर आयेंगे । आखिर सरकार जनता की समस्याओं को दूर करने के बजाये जनता पर ओर बोझ बढ़ा रही है जनता के पैसों से मन्त्रिगणों को मोज करने का आखिर क्या हक़ है । जनता ने सारकार को निर्वाचित किया इसका यह मतलब नही की वो सरकार अब 5 शालों तक अपनी मनमानी करे। सरकार को कोई भी फेसला करने से पहले राज्य की जनता से उस बारे में सर्वे कर राय लेनी चाहिए थी क्यूंकि ये राजकोष किसी मंत्री का नही बल्कि जनता का है जिसका प्रयोग किस प्रकार करना है इसका फैसला करने का हक़ सिर्फ जनता को ही होना चाहिए
Tuesday, 18 December 2012
हैवानियत की हद की पार, पछतावे से किया इन्कार
नई दिल्ली। गैंगरेप से पहले बस के ड्राइवर राम सिंह ने राम आधार
नामक व्यक्ति को अपनी बस में लिफ्ट देकर उसका सारा सामान लूट लिया था।
दोषियों ने गुनाह करने से पहले एक और गुनाह कर डाला था। हैवानियत की इतनी
हदें पार करने के बाद भी आरोपियों को शर्म नहीं है। बस का ड्राइवर राम सिंह
साफ कहता है कि उसे कोई अफसोस नहीं है,उसे अपने किए पर कोई पछतावा नहीं
है। यहीं नहीं सभी आरोपी इसे एक मजाक की तरह ले रहे हैं। पुलिस सूत्रों ने बताया कि लड़की के साथ बलात्कार करने से पहले छह आरोपियों ने जमकर शराब पी थी और सभी मस्ती के मूड में थे। आरोपी राम सिंह ने बताया कि वह एक जॉयराइड करने में निकले थे और सभी एक दूसरे को अच्छी तरह से जानते थे।
राम सिंह से पूछताछ के दौरान पता चला कि राम सिंह को तब गुस्सा ज्यादा आया जब लड़की ने उसके हाथों में अपने दांतों से काट लिया। राम सिंह ने बताया कि लड़की ने अपना बचाव करते हुए राम सिंह के हाथों में काट लिया। इसके बाद राम सिंह को अपने गुस्से पर काबू नहीं रहा और उसने लड़की को उसके दोस्त के साथ गाड़ी से नीचे फेंक दिया।
Tuesday, 11 December 2012
अमेरिका ने कहा, वॉलमार्ट ने कानून नहीं तोड़ा

अमेरिका ने कहा, वॉलमार्ट ने कानून नहीं तोड़ा
विदेश विभाग की प्रवक्ता विक्टोरिया नुलैंड ने भारत के विपक्षी दलों के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि अमेरिका की नजर से मैं नहीं मानती कि हमने यहा किसी अमेरिकी कानून का उल्लंघन किया है। जहा तक भारत की बात है तो आप उनसे बात करिए। वह भारत में विपक्षी दलों के आरोपों के बारे में पूछे गए सवालों का जवाब दे रही थीं।
उन्होंने कहा कि हमने ये खबरें देखी हैं। अमेरिका में लॉबिंग के संबंध में मुझे लगता है कि आपको लॉबी डिस्क्लोजर एक्ट 1995 और ओनेस्ट लीडरशिप एंड ओपन गवर्नमेंट एक्ट 2007 की जानकारी होगी जिसके अनुसार हर कंपनी को एक रिपोर्ट में अपनी लॉबिंग गतिविधियों की जानकारी देनी होती है।
नुलैंड ने कहा कि इन आरोपों में जिस रिपोर्ट का जिक्र किया गया है वह अमेरिका द्वारा समय समय पर मागी जाने वाली एक रिपोर्ट है। यह हमारी सरकार की पारदर्शिता प्रणाली का एक हिस्सा है।
इस बीच वॉलमार्ट ने भी किसी गलत गैरकानूनी गतिविधि में शामिल होने से इन्कार किया है। कंपनी के प्रवक्ता ने अपने बयान में कहा, आरोप पूरी तरह से बेबुनियाद हैं। हमने लॉबिंग पर पैसे खर्च किए हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि किसी को घूस दिया है। अमेरिका में लॉबिंग को कानूनी मान्यता मिली हुई है और कंपनियों को हर तीन महीने में खर्च का ब्योरा देना होता है।
प्रवक्ता ने बयान में कहा है कि लॉबिंग के ऊपर किए गए खर्च कर्मचारियों, बैठक, यात्रा, परामर्शदाता, वकील, दूसरी देनदारियां और कार्य में दिए गए अन्य योगदान के मद में है। कंपनी के अधिकारी ने कहा, हम स्वाभाविक रूप से अमेरिकी अधिकारियों के साथ व्यापार और निवेश मुद्दों पर चर्चा करते रहते हैं, जो अमेरिका तथा दुनिया के अन्य देशों पर प्रभाव डालता है। इसके लिए बैठक होती है, यात्रा की जाती है, इन सब मदों में खर्च को लॉबिंग के तहत माना जाता है। लॉबिंग कानून के अनुसार पारदर्शिता के लिए इस पर खर्च की गई रकम के बारे में संसद को जानकारी दी जाती है।
वॉलमार्ट द्वारा 2008 से अब तक भारत में एफडीआइ तथा बाजार पहुंच बढ़ाने सहित विभिन्न लॉबिंग गतिविधियों पर 125 करोड़ रुपये खर्च करने की खबर के मद्देनजर भाजपा और वामदल ने संसद में आरोप लगाया था कि ये रकम भारत में खर्च किए गए हैं। वे भारत में किस-किस को पैसा मिला, इसकी जांच की मांग कर रहे हैं।
ankur gusain
mass comm student {rishikesh}
Friday, 7 December 2012
संसद में एफडीआई के मुद्दे
पर सियासी जीत के बाद अब सरकार आर्थिक सुधारों पर फर्राटा भरने के लिए
तैयार हो गई है। बसपा और सपा के सहारे से एफडीआई पर विपक्ष के वोटिंग के
प्रस्ताव को शिकस्त देकर सरकार अब अगले बजट सत्र की अपनी सियासी राह आसान
बनाने की रणनीति बुनने लगी है। माना जा रहा है कि इस हार के बाद अब विपक्ष
की ओर से भी सरकार के नंबर की परीक्षा लेने की संभावना कम होगी।
शुक्रवार को वोटिंग के प्रस्ताव पर जीत दर्ज करने के बाद सरकार की राजनीतिक चुनौती कम हो गई है। ममता बनर्जी के समर्थन वापस लेने के बाद अल्पमत में नजर आ रही सरकार अब इस जीत से मजबूत नजर आ रही है। लिहाजा, सरकार ने आर्थिक सुधारों की गाड़ी तेज करने का दावा ठोक दिया है।
संसदीय कार्यमंत्री कमलनाथ ने कहा कि संसद में आने वाले समय में आर्थिक सुधार से संबंधित और कई बिल पेश करने की सरकार की तैयारी है। सरकार के आर्थिक सुधार के एजेंडे में कंपनी मामलों से संबंधित बिल, बीमा में निवेश, पेंशन और वायदा कारोबार से संबंधित बिल लंबित पड़े हैं। ताजा जीत के बाद सरकार अब इन सभी बिलों को संसद में पारित कराने की तैयारी कर रही है।
सरकार का मानना है कि बसपा के खुलकर समर्थन देने से अब उसे बहुमत जुटाने में कोई मुश्किल नहीं होगी। वहीं बसपा के चलते अब सपा की भी सरकार को मदद देने की राजनीतिक मजबूरी होगी। यही नहीं उत्साहित सरकार अब विपक्ष से भी बात करने की तैयारी कर रही है। कमलनाथ ने कहा कि वह आर्थिक सुधारों से संबंधित बिल पर भाजपा नेताओं से भी समर्थन को लेकर बात करने की योजना बना रहे हैं।
सपा-बसपा की सियासत
--9 सदस्यों के साथ सपा ने वॉकआउट कर सरकार को दी संजीवनी।
--15 सदस्यों वाली बसपा ने यूपीए के पक्ष में दिया वोट।
दोबारा हुई मतों की गिनती
राज्यसभा में तब अजीबोगरीब स्थिति पैदा हो गई जब मत विभाजन के बाद सरकार की मांग पर एफडीआई पर हुए मत विभाजन की दोबारा गिनती कराई गई। सरकार का कहना था कि उसे ऐसा आभास होता है कि कुल मतों की संख्या सदन में मौजूद सदस्यों की संख्या से अधिक रही।
ये भी रहे अनुपस्थित
सचिन तेंदुलकर (मनोनीत) : कोलकाता टेस्ट खेल रहे हैं।
मुरली देवड़ा (कांग्रेस) : अस्वस्थ।
प्यारी मोहन महापात्रा (बीजद) : अनुपस्थित।
रिटेल में एफडीआई के खिलाफ प्रस्ताव
कुल : 244
पक्ष में : 102
विपक्ष में : 123
मतदान नहीं किया : 19
शुक्रवार को वोटिंग के प्रस्ताव पर जीत दर्ज करने के बाद सरकार की राजनीतिक चुनौती कम हो गई है। ममता बनर्जी के समर्थन वापस लेने के बाद अल्पमत में नजर आ रही सरकार अब इस जीत से मजबूत नजर आ रही है। लिहाजा, सरकार ने आर्थिक सुधारों की गाड़ी तेज करने का दावा ठोक दिया है।
संसदीय कार्यमंत्री कमलनाथ ने कहा कि संसद में आने वाले समय में आर्थिक सुधार से संबंधित और कई बिल पेश करने की सरकार की तैयारी है। सरकार के आर्थिक सुधार के एजेंडे में कंपनी मामलों से संबंधित बिल, बीमा में निवेश, पेंशन और वायदा कारोबार से संबंधित बिल लंबित पड़े हैं। ताजा जीत के बाद सरकार अब इन सभी बिलों को संसद में पारित कराने की तैयारी कर रही है।
सरकार का मानना है कि बसपा के खुलकर समर्थन देने से अब उसे बहुमत जुटाने में कोई मुश्किल नहीं होगी। वहीं बसपा के चलते अब सपा की भी सरकार को मदद देने की राजनीतिक मजबूरी होगी। यही नहीं उत्साहित सरकार अब विपक्ष से भी बात करने की तैयारी कर रही है। कमलनाथ ने कहा कि वह आर्थिक सुधारों से संबंधित बिल पर भाजपा नेताओं से भी समर्थन को लेकर बात करने की योजना बना रहे हैं।
सपा-बसपा की सियासत
--9 सदस्यों के साथ सपा ने वॉकआउट कर सरकार को दी संजीवनी।
--15 सदस्यों वाली बसपा ने यूपीए के पक्ष में दिया वोट।
दोबारा हुई मतों की गिनती
राज्यसभा में तब अजीबोगरीब स्थिति पैदा हो गई जब मत विभाजन के बाद सरकार की मांग पर एफडीआई पर हुए मत विभाजन की दोबारा गिनती कराई गई। सरकार का कहना था कि उसे ऐसा आभास होता है कि कुल मतों की संख्या सदन में मौजूद सदस्यों की संख्या से अधिक रही।
ये भी रहे अनुपस्थित
सचिन तेंदुलकर (मनोनीत) : कोलकाता टेस्ट खेल रहे हैं।
मुरली देवड़ा (कांग्रेस) : अस्वस्थ।
प्यारी मोहन महापात्रा (बीजद) : अनुपस्थित।
रिटेल में एफडीआई के खिलाफ प्रस्ताव
कुल : 244
पक्ष में : 102
विपक्ष में : 123
मतदान नहीं किया : 19
"ankur gusain "
गन्दगी की चपेट में आती तीर्थनगरी
तीर्थ नगरी के नाम से पूरी दुनिया में मशहूर ऋषिकेश लगातार गन्दगी के गोद में समाता जा रहा है ! जहा देखो बस गन्दगी ही गन्दगी ! न ही साशन को इसकी चिंता है और न ही प्रशासन को इसकी सुध है ! देश और विदेश से यहाँ बहुत से पर्यटक भ्रमण करने आते है और इन्ही पर्यटकों से सरकार को आय भी होती है लेकिन अगर यही आलम रहा और बढती गन्दगी को रोका नहीं गया तो भविष्य में जो तीर्थनगरी अपनी भव्यता , सुन्दरता और शांति के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध है वो अपनी प्रसिद्धि खोती चली जाएगी जिससे के परिणाम बेहद गम्भीर होंगे ! तो शाशन और प्रशाशन को अब जागना चाहिए और गन्दगी को रोकने के लिए ठोस कदम उठाना चाहिए !
अंकुर गुसाईं {ऋषिकेश} ankurgusain04@yahoo.com
तीर्थ नगरी के नाम से पूरी दुनिया में मशहूर ऋषिकेश लगातार गन्दगी के गोद में समाता जा रहा है ! जहा देखो बस गन्दगी ही गन्दगी ! न ही साशन को इसकी चिंता है और न ही प्रशासन को इसकी सुध है ! देश और विदेश से यहाँ बहुत से पर्यटक भ्रमण करने आते है और इन्ही पर्यटकों से सरकार को आय भी होती है लेकिन अगर यही आलम रहा और बढती गन्दगी को रोका नहीं गया तो भविष्य में जो तीर्थनगरी अपनी भव्यता , सुन्दरता और शांति के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध है वो अपनी प्रसिद्धि खोती चली जाएगी जिससे के परिणाम बेहद गम्भीर होंगे ! तो शाशन और प्रशाशन को अब जागना चाहिए और गन्दगी को रोकने के लिए ठोस कदम उठाना चाहिए !
अंकुर गुसाईं {ऋषिकेश} ankurgusain04@yahoo.com
नेताओं के बदलते रुख

जिस एफडीआई को लेकर पुरे देश भर में कोहराम मचा हुआ लेकिन सरकार के लिए ये सिर्फ मजाक बन कर रह गया है क्यूंकि सरकार पुरे बहुम त
में है जिससे वो जो चाहे वो कर सकती है उसके यह प्रस्ताव पास करवाना तो
मामूली है जिस तरह यह लोक सभा में पास हो चूका है उसी तरह से यह राज्य सभा
तथा देश में लागु भी हो जायेगा क्यूंकि भारत देश में जनता तो सिर्फ एक बार
अपना प्रतिनिधि चुन देती है लेकिन ये नेता लोग इन पांच सालों में अपनी
मनमानी करते रहते हैं जंहा बसपा सुप्रीमों मायावती और सपा सुप्रीमों
मुलायम सिंह यादव शुरुवात में एफडीआई के प्रति कड़ा रुख दिखा रहे थे वंही
उन्होंने राज्य सभा में एफडीआई के लिए वोट देने का फेसला कर सरकार की
मुशकीलें ख़त्म कर दी हैं नेता अपने रुख कब बदल ले इसका पता ही नही चलता है ये सिर्फ जनता को भ्रमित करते रहते हैं
इन सबसे सही तो तृणमूल सुप्रीमों ममता बनर्जी ही थी जो अपने फेसले पर अडिग रही
आखिर ये नेता कब अपने आप पर काबू रखकर जनता के मनो की भावनाओं को समझ पाएंगे
आखिरे कब हमारे यंहा अच्छे नेताओं का उदभव होगा
कृष्ण मुरारी
ऋषिकेश
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