अमेरिका ने कहा, वॉलमार्ट ने कानून नहीं तोड़ा

अमेरिका ने कहा, वॉलमार्ट ने कानून नहीं तोड़ा
वाशिंगटन। भारत में एफडीआइ को लेकर सांसदों के साथ की गई लॉबिंग
पर 125 करोड़ रुपये खर्च करने की खबरों से उपजे विवाद के बीच अमेरिका ने कहा
कि इस मामले में अमेरिकी कानून का उल्लंघन नहीं किया गया है।
विदेश विभाग की प्रवक्ता विक्टोरिया नुलैंड ने भारत के विपक्षी दलों के
आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि अमेरिका की नजर से मैं नहीं मानती कि
हमने यहा किसी अमेरिकी कानून का उल्लंघन किया है। जहा तक भारत की बात है तो
आप उनसे बात करिए। वह भारत में विपक्षी दलों के आरोपों के बारे में पूछे
गए सवालों का जवाब दे रही थीं।
उन्होंने कहा कि हमने ये खबरें देखी हैं। अमेरिका में लॉबिंग के संबंध
में मुझे लगता है कि आपको लॉबी डिस्क्लोजर एक्ट 1995 और ओनेस्ट लीडरशिप एंड
ओपन गवर्नमेंट एक्ट 2007 की जानकारी होगी जिसके अनुसार हर कंपनी को एक
रिपोर्ट में अपनी लॉबिंग गतिविधियों की जानकारी देनी होती है।
नुलैंड ने कहा कि इन आरोपों में जिस रिपोर्ट का जिक्र किया गया है वह
अमेरिका द्वारा समय समय पर मागी जाने वाली एक रिपोर्ट है। यह हमारी सरकार
की पारदर्शिता प्रणाली का एक हिस्सा है।
इस बीच वॉलमार्ट ने भी किसी गलत गैरकानूनी गतिविधि में शामिल होने से
इन्कार किया है। कंपनी के प्रवक्ता ने अपने बयान में कहा, आरोप पूरी तरह से
बेबुनियाद हैं। हमने लॉबिंग पर पैसे खर्च किए हैं, लेकिन इसका मतलब यह
नहीं है कि किसी को घूस दिया है। अमेरिका में लॉबिंग को कानूनी मान्यता
मिली हुई है और कंपनियों को हर तीन महीने में खर्च का ब्योरा देना होता है।
प्रवक्ता ने बयान में कहा है कि लॉबिंग के ऊपर किए गए खर्च
कर्मचारियों, बैठक, यात्रा, परामर्शदाता, वकील, दूसरी देनदारियां और कार्य
में दिए गए अन्य योगदान के मद में है। कंपनी के अधिकारी ने कहा, हम
स्वाभाविक रूप से अमेरिकी अधिकारियों के साथ व्यापार और निवेश मुद्दों पर
चर्चा करते रहते हैं, जो अमेरिका तथा दुनिया के अन्य देशों पर प्रभाव डालता
है। इसके लिए बैठक होती है, यात्रा की जाती है, इन सब मदों में खर्च को
लॉबिंग के तहत माना जाता है। लॉबिंग कानून के अनुसार पारदर्शिता के लिए इस
पर खर्च की गई रकम के बारे में संसद को जानकारी दी जाती है।
वॉलमार्ट द्वारा 2008 से अब तक भारत में एफडीआइ तथा बाजार पहुंच बढ़ाने
सहित विभिन्न लॉबिंग गतिविधियों पर 125 करोड़ रुपये खर्च करने की खबर के
मद्देनजर भाजपा और वामदल ने संसद में आरोप लगाया था कि ये रकम भारत में
खर्च किए गए हैं। वे भारत में किस-किस को पैसा मिला, इसकी जांच की मांग कर
रहे हैं।
ankur gusain
mass comm student {rishikesh}