बर्फी ने जहां ऑस्कर में भेजे जाने के लिए पूरे भारत से चुनी गई 20 फिल्मों को पीछे छोड़ते हुए ऑस्कर की तरफ अपना कदम और करीब बढ़ाया वहीं पीछे छूट गई फिल्मों के निर्देशक ऑस्कर्स के सेलेक्शन प्रोसेस को खराब बताने लगे। सबसे अधिक नाराज हैं विकी डोनर के निर्देशक शूजीत सिरकार। दूसरी तरफ साउथ की हिट फिल्म ईगा के ऑस्कर से बाहर आ जाने से इसके निर्देशक राजामौली को थोड़ी सी निराशा तो हुई है लेकिन इसके बावजूद उन्हें बर्फी के नॉमिनेशन से कोई शिकायत नहीं है।
रणबीर कपूर और प्रियंका चोपड़ा को आखिरकार उनकी मेहनत का फल मिल ही गया और बर्फी को ऑस्कर अवॉर्ड के लिए नॉमिनेट किया गया। बर्फी कहानी है एक बेज़ुबां लड़के मर्फी की जो ना तो बोल सकता है और ना ही सुन सकता है। लेकिन इतनी बड़ी कमी के बावजूद मर्फी उर्फ बर्फी ज़िंदगी जीने का अपना एक अलग अंदाज रखता है और बाकी लोगों से बेहतर और खुशी भरी ज़िंदगी जीता है।
फिल्म में रणबीर कपूर और प्रियंका चोपड़ा ने बिना कुछ बोले सिर्फ आंखों से ही बात की है और अपने एहसासों को परदे पर उतारा है। कई लोगों का मानना है कि बर्फी कमर्शियल फिल्म नहीं बल्कि एक आर्ट फिल्म है। लेकिन फिल्म को देखकर कहीं से भी ऐसा नहीं लगता कि ये फिल्म व्यवसायिक नहीं है। ये कहा जा सकता है कि बर्फी आर्ट और कमर्शियल दोनों फिल्मों का मिला जुला रुप है। लेकिन पूरी तरह से इसे आर्ट फिल्म कहना गलत होगा। अभी तक जब भी कभी किसी थीम पर फिल्म बनी है तो उसे आर्ट फिल्म की कैटेगरी में डाल दिया गया लेकिन बर्फी के साथ ऐसा नहीं है। ये एक बेहतरीन थीम पर बनी कमर्शियल फिल्म है जिसे आर्ट फिल्म का टच दिया गया है।
अनुराग बासु की ये पहली फिल्म ऑस्कर्स के लिए नॉमिनेट हुई है साथ ही रणबीर कपूर और प्रियंका चोपड़ा के लिए भी ये पहली बार है जब उनकी किसी फिल्म को इतना सराहा जा रहा है। ज्ञात हो कि फिल्म के रिलीज होने से पहले ही बॉलीवुड सितारों ने प्रियंका और रणबीर की एक्टिंग की काफी तारीफ की थी। उस वक्त शायद खुद रणबीर और प्रियंका ने भी नहीं सोचा होगा कि उनकी फिल्म ऑस्कर में जाएगी।
FROM ------ कुंती सिंह , MJMC,OIMT


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